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कुशीनगर में बड़ा हादसा: ड्रेन के गहरे पानी में समाईं तीन बहनें, तलाश के बाद बरामद हुए शव

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कुशीनगर। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। ड्रेन में डूबने से तीन सगी बहनों की दर्दनाक मौत हो गई। करीब 12 घंटे तक चले राहत और बचाव अभियान के बाद तीनों के शव बरामद किए गए। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।

बताया जा रहा है कि तीनों बहनें किसी काम से घर के बाहर गई थीं। इसी दौरान वे ड्रेन के पास पहुंच गईं और अचानक गहरे पानी में चली गईं। काफी समय तक उनके घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। अनहोनी की आशंका होने पर पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम, स्थानीय गोताखोर और राहत दल मौके पर पहुंचे। रातभर चले अभियान के दौरान ड्रेन में तलाश की गई। कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद एक-एक कर तीनों बहनों के शव बरामद किए गए।

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मासूम बच्चियों की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक का माहौल है।

पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में मामला डूबने से मौत का सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि खुले ड्रेन और खतरनाक जलभराव वाले क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के दर्दनाक हादसों को रोका जा सके।

घटना ने उठाए सुरक्षा पर सवाल

कुशीनगर की इस घटना ने एक बार फिर खुले नालों, ड्रेन और जलभराव वाले स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर चेतावनी संकेत और सुरक्षा बैरिकेड लगाए जाने चाहिए, जिससे लोगों की जान बचाई जा सके।

प्रयागराज में छात्रों से संवाद करेंगे राहुल गांधी, 8 अगस्त के कार्यक्रम के लिए 1.5 लाख युवाओं ने कराया पंजीकरण

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प्रयागराज। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के प्रयागराज दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह छात्रों और युवाओं के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कांग्रेस का दावा है कि इस कार्यक्रम के लिए अब तक करीब 1.5 लाख छात्रों और युवाओं ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है, जिससे इसे राज्य के सबसे बड़े छात्र संवाद कार्यक्रमों में से एक माना जा रहा है।

पार्टी नेताओं के अनुसार, संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और युवाओं की समस्याओं को सीधे सुनना तथा शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र भी शामिल होंगे।

कांग्रेस संगठन ने कार्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रयागराज और आसपास के जिलों में व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। स्वयंसेवकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को छात्रों के पंजीकरण, कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाओं और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी अपने संबोधन में शिक्षा व्यवस्था में सुधार, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं पर रोक और सामाजिक न्याय जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे। साथ ही छात्रों को अपने सवाल सीधे पूछने का भी अवसर दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों को देखते हुए राहुल गांधी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि कांग्रेस इस संवाद के माध्यम से युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने और छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की रणनीति पर काम कर रही है।

हालांकि, कार्यक्रम में पंजीकरण कराने वाले सभी छात्र उपस्थित होंगे या नहीं, यह आयोजन स्थल की क्षमता और अंतिम व्यवस्थाओं पर निर्भर करेगा। प्रशासन की ओर से सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार प्रमुख बने हुए हैं। ऐसे में राहुल गांधी का यह छात्र संवाद कार्यक्रम आने वाले समय में प्रदेश की राजनीतिक चर्चा का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

सावन में आस्था का महासंगम: 2 अगस्त को माँ नर्मदा चुनरी महोत्सव से होगा शुभारंभ, 3 से 10 अगस्त तक निकलेगी ऐतिहासिक श्री जटाशंकर कावड़ यात्रा

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नर्मदापुरम। सावन मास में भगवान भोलेनाथ की भक्ति, माँ नर्मदा की आराधना और सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का भव्य संगम एक बार फिर नर्मदापुरम में देखने को मिलेगा। जिले की प्रतिष्ठित धार्मिक परंपराओं में शामिल ऐतिहासिक श्री जटाशंकर कावड़ यात्रा 2026 का आयोजन 3 अगस्त से 10 अगस्त तक किया जाएगा। यात्रा की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। आयोजन समिति की प्रमुख सुश्री राजो मालवीय ने प्रदेशभर के शिवभक्तों, मातृशक्ति, युवाओं एवं धर्मप्रेमी नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस महाआस्था यात्रा में शामिल होकर इसे सफल बनाने की अपील की है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष यात्रा का शुभारंभ 2 अगस्त 2026, रविवार को सायं 4 बजे नर्मदापुरम के ऐतिहासिक सेठानी घाट पर आयोजित माँ नर्मदा चुनरी महोत्सव एवं दीपदान से होगा। इस अवसर पर माँ नर्मदा का विधि-विधान से पूजन-अर्चन, चुनरी अर्पण तथा सामूहिक दीपदान किया जाएगा। श्रद्धालु प्रदेश, देश और विश्व में सुख, शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना करते हुए माँ नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। शाम के समय हजारों दीपों से जगमगाता सेठानी घाट श्रद्धा और भक्ति का अनुपम दृश्य प्रस्तुत करेगा।

इसके पश्चात 3 अगस्त को प्रातः 9 बजे सेठानी घाट से ऐतिहासिक श्री जटाशंकर कावड़ यात्रा का शुभारंभ होगा। श्रद्धालु माँ नर्मदा का पवित्र जल कावड़ में भरकर भगवान भोलेनाथ के जयघोष “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के साथ पदयात्रा करते हुए श्री जटाशंकर महादेव मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं का स्वागत, पुष्पवर्षा, भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया जाएगा।

यह यात्रा 10 अगस्त 2026 को प्रातः 10 बजे श्री जटाशंकर महादेव मंदिर में भगवान शिव के पावन जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महाआरती एवं विशेष पूजन-अर्चन के साथ सम्पन्न होगी। अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

सुश्री राजो मालवीय ने कहा कि श्री जटाशंकर कावड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सामाजिक समरसता, सेवा, अनुशासन और राष्ट्रहित की भावना का जीवंत प्रतीक है। वर्षों से यह यात्रा समाज के विभिन्न वर्गों को एक सूत्र में जोड़ते हुए धार्मिक एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश देती आ रही है। मध्यप्रदेश के अनेक जिलों सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु प्रतिवर्ष इस यात्रा में शामिल होकर भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं।

उन्होंने कहा कि यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए आयोजन समिति ने व्यापक तैयारियां की हैं। पूरे यात्रा मार्ग पर पेयजल, चिकित्सा सुविधा, विश्राम स्थल, प्रसादी वितरण, प्राथमिक उपचार, सुरक्षा व्यवस्था एवं स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात रहेगी। प्रशासन के सहयोग से यातायात एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यक प्रबंध भी किए गए हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

यात्रा संयोजक पंडित दिनेश तिवारी, महामंत्री गोविंद दुबे एवं गजेंद्र मालवीय ने बताया कि आयोजन समिति के सभी सदस्य कई दिनों से तैयारियों में जुटे हुए हैं। यात्रा के प्रत्येक चरण को व्यवस्थित एवं अनुशासित ढंग से संपन्न कराने के लिए अलग-अलग समितियों का गठन किया गया है। स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सहायता एवं मार्गदर्शन के लिए पूरे समय उपलब्ध रहेंगे।

आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं से धार्मिक गरिमा बनाए रखने, स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने, प्लास्टिक के उपयोग से बचने, यात्रा मार्ग को स्वच्छ रखने तथा प्रशासन एवं स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि समाज में सेवा, सहयोग, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देती है।

सुश्री राजो मालवीय ने अंत में समस्त शिवभक्तों से आह्वान करते हुए कहा कि सावन के इस पुण्य अवसर पर माँ नर्मदा एवं भगवान भोलेनाथ की आराधना में सहभागी बनें और धर्म, संस्कृति तथा सेवा के इस महाआयोजन को अपनी सहभागिता से और अधिक भव्य एवं सफल बनाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की भेंट, छत्तीसगढ़ के विकास और ‘बस्तर विजन’ पर हुई विस्तृत चर्चा

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर छत्तीसगढ़ के समग्र विकास, बस्तर के कायाकल्प तथा राज्य की महत्वपूर्ण अधोसंरचना एवं औद्योगिक परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष बदलते छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर के विकास का रोडमैप प्रस्तुत करते हुए राज्य की तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सुरक्षा, विश्वास और विकास की समन्वित रणनीति के परिणामस्वरूप बस्तर आज व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दशकों तक नक्सल हिंसा और विकास संबंधी चुनौतियों का सामना करने वाला यह क्षेत्र अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रेल, बिजली, हवाई संपर्क, आजीविका, खेल और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य इस परिवर्तन को स्थायी बनाते हुए बस्तर को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना है।

मुख्यमंत्री साय ने राजनांदगांव में ₹10,500 करोड़ की यूरिया परियोजना के लिए शीघ्र मंजूरी का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजनांदगांव में प्रस्तावित लगभग ₹10,500 करोड़ की गैस आधारित यूरिया परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करा दी गई है तथा राज्य सरकार के स्तर की आवश्यक स्वीकृतियां भी पूरी की जा चुकी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के स्थापित होने से छत्तीसगढ़ सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता और बेहतर होगी। इसके साथ ही प्रदेश में औद्योगिक निवेश, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार तथा सहायक आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

461 गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए मांगी विशेष सहायता
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर सहित संवेदनशील क्षेत्रों के ऐसे 461 गांवों का विषय भी प्रधानमंत्री के समक्ष रखा, जहां पूर्व में सुरक्षा एवं भौगोलिक कारणों से विद्युत ग्रिड पहुंचाना संभव नहीं हो पाया था और वर्तमान में ऑफ-ग्रिड माध्यम से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इन गांवों को स्थायी विद्युत ग्रिड से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार से विशेष सहयोग का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थायी विद्युत आपूर्ति से इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, आजीविका और लघु उद्यमों के विस्तार को गति मिलेगी तथा दूरस्थ अंचलों में विकास की प्रक्रिया और मजबूत होगी।

रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना का किया अनुरोध
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से रायपुर अथवा बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) की स्थापना के प्रस्ताव पर सकारात्मक पहल का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर और अन्य जनजातीय क्षेत्रों में औषधीय वनस्पतियों एवं पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान की समृद्ध विरासत है। राष्ट्रीय स्तर के आयुर्वेद संस्थान की स्थापना से चिकित्सा, अनुसंधान, शिक्षा और औषधीय वनस्पतियों पर आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए नई संभावनाएं विकसित होंगी।

भारतीय जूडोका अस्मिता डे का राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक स्वर्ण, हर्ष ने भी हासिल किया सोना

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cwg-भारत ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन किया है। भारत ने जूडो में लगातार दूसरा स्वर्ण पदक जीता है। पहले अस्मिता डे ने महिला 48 किग्रा वर्ग में सोना अपने नाम किया और अब हर्ष सिंह ने पुरुष 60 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता। हर्ष ने फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को 10-0 से हराकर भारत को स्वर्ण दिलाया। हर्ष राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण जीतने वाले दूसरे और पहले पुरुष जूडोका हैं। अस्मिता और हर्ष से पहले अब तक किसी भारतीय जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता है।

अस्मिता CWG में स्वर्ण जीतने वाली पहली जूडोका
भारतीय जूडिका अस्मिता डे ने शानदार प्रदर्शन किया और सोने का तमगा हासिल करने में सफल रहीं। त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता का यह स्वर्ण ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले भारत की ओर से किसी भी जूडोका ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक नहीं जीता था। अस्मिता का सामना फाइनल में कनाडा की हेडी काच से हुआ। अस्मिता फाइनल मुकाबले में 0-1 से पिछड़ रही थीं, लेकिन उन्होंने जल्द ही वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया। चार मिनट का निर्धारित समय पूरा होने के बाद मुकाबला सडन डैथ तक खींचा, जहां इस भारतीय जूडोका ने 2-1 से मुकाबला अपने नाम कर सोना अपने नाम किया। मालूम हो कि सडन डैथ में पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है।

जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों की जूडो स्पर्धा में पहली बार 1990 में ऑकलैंड में हुए खेलों के दौरान हिस्सा लिया था। इस ऐतिहासिक पहले संस्करण में ही भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पदक भी जीते थे। नरेंद्र सिंह (60 किग्रा भार वर्ग) और राजिंदर कुमार ढांगर (86 किग्रा भार वर्ग) ने कांस्य पदक जीतकर भारत का खाता खोला था। हालांकि, इसके बाद भारत राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य और रजत पदक जीतता रहा, लेकिन कभी भी कोई भारतीय जूडोका स्वर्ण पदक अपने नाम नहीं कर सका था। आज यह तिलिस्म भी टूटा। पहले अस्मिता और अब हर्ष ने एक ही दिन में जूडो में दो स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाले।

अस्मिता ने फाइनल से पहले सेमीफाइनल में किया था दमदार प्रदर्शन
फाइनल से पहले अस्मिता ने सेमीफाइनल में दमदार प्रदर्शन किया था। युवा खिलाड़ी अस्मिता डे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘युको’ के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया था। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की थी। इससे पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। जूडो में ‘इप्पोन’ को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। ‘युको’ अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।

सावन के महीने में OTT-थिएटर्स में लगेगा मनोरंजन का मेला

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शुक्रवार मतलब वीकेंड वाली फीलिंग और काम करने का मन करना। सिने लवर्स तो आज ही से प्लान बनाने में लग जाते हैं कि छुट्टी वाले दिन उन्हें क्या देखना है। अगर आप भी वीकेंड पर कहीं न जाने का प्लान कर रहे तो हम आपके लिए सिनेमाघरों से लेकर ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्में और सीरीज लेकर आए हैं जिन्हें आप घर बैठकर मजे से बिंज वॉच कर सकते हैं।

दिल को छू लेने वाले ड्रामा और साइकोलॉजिकल थ्रिलर से लेकर एनिमेटेड सुपरहीरो एडवेंचर और सच्ची घटनाओं पर आधारित क्राइम डॉक्यूमेंट्री तक। इस बार सिनेमा के पिटारे में क्या-क्या है चलिए जानते हैं।

है जवानी तो इश्क होना है (Hai Jawani to Ishq Hona Hai)
कहानी- वरुण धवन, मृणाल ठाकुर, पूजा हेगड़े और मनीष पॉल स्टारर यह रोमांटिक कॉमेडी ‘जस’ की कहानी है। उसकी शादी टूट जाती है, लेकिन विदेश में शुरू हुई एक नई लव स्टोरी उसे प्यार, वफादारी और कमिटमेंट के बारे में फिर से सोचने पर मजबूर कर देती है। आप इसे 31 जुलाई, 2026 से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर देख सकते हैं।

द डेविल वेयर्स प्राडा 2 (The Devil Wears Prada 2)
पहली फिल्म के लगभग दो दशक बाद, ‘द डेविल वेयर्स प्राडा 2’ दर्शकों को मिरांडा प्रीस्टली से फिर से मिलाती है, जो तेजी से बदलती फैशन इंडस्ट्री में अपना रास्ता बना रही हैं। यह सीक्वल बदलती फैशन इंडस्ट्री, कॉर्पोरेट कॉम्पटीशन और बदलते रिश्तों की कहानी है। साथ ही इसमें वही तीखा मजाक, ग्लैमर और वर्कप्लेस ड्रामा भी है जिसने पहली फिल्म को दुनिया भर में इतना लोकप्रिय बनाया था।

रोमांस: माय लाइफ विद द वॉल्टर बॉयज
आने वाले तीसरे सीजन में, जैकी सिल्वर फॉल्स लौटती है। वह अपने रिश्तों को फिर से बनाने और एलेक्स और कोल के लिए अपनी उलझी हुई भावनाओं के बीच साफ सोच पाने के लिए पक्का इरादा कर चुकी है। जब वॉल्टर परिवार नई चुनौतियों का सामना करता है, तो जैकी प्यार, अपनी तरक्की और मुश्किल फैसलों के बीच अपना रास्ता बनाती है और यह भी पता लगाती है कि असल में उसकी जगह कहां है। आप इसे 6 अगस्त से नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं।

बालन: द ब्वॉय
बालन अपनी मां के साथ एक महिला जेल में बड़ा होता है। उसका बचपन अपनी पहचान बदलते हुए और छिपते-छिपाते बीतता है। जब वह अपने अतीत का सच जानने की कोशिश करता है, तो वह दबे हुए राज, खतरनाक खुलासों और भावनात्मक खोजों के ऐसे जाल में फंस जाता है जो उसकी जिंदगी के बारे में उसकी सारी सोच को ही बदल देता है। आप इसे जी5 पर देख सकते हैं।

द लीजेंड ऑफ कर्ण (The Legend Of Karn)
यह कहानी कर्ण की है, जो प्राचीन भारतीय महाकाव्य महाभारत का एक दुखद नायक है। वह अपनी बेमिसाल उदारता, तीरंदाजी के अद्भुत कौशल और अपने दोस्त के प्रति अटूट वफादारी के लिए मशहूर है, भले ही उसने एक विशाल युद्ध में गलत पक्ष की ओर से लड़ाई लड़ी थी। आप इसे सोनी लिव पर देख सकते हैं।

नगर निगम की चेतावनी भी बेअसर, 10 दिवसीय नोटिस की मियाद पूरी

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निगम का दावा था अवैध दुकानों को सील करेंगे, अधिकांश संस्थान खुले रहे

“यदि नगर निगम अवैध व्यावसायिक परिसरों पर कार्रवाई नहीं करता तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर करेंगे” – विवेक त्रिपाठी
भोपाल। भोपाल नगर निगम द्वारा किए गए उस दावे की गुरुवार को पूरी तरह पोल खुल गई, जिसमें कहा गया था कि 10 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद आवासीय परिसरों में संचालित अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील करने की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। इस घोषणा से रहवासियों में यह उम्मीद जगी थी कि उनकी वर्षों पुरानी शिकायतों पर प्रशासन अब गंभीरता से कार्रवाई करेगा, किंतु वास्तविकता इसके विपरीत रही। अधिकांश अवैध दुकानें एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान पूरे दिन सामान्य रूप से संचालित होते रहे और नगर निगम की कार्रवाई कहीं दिखाई नहीं दी।

भोपाल की पॉश अरेरा कॉलोनी सहित अनेक आवासीय क्षेत्रों के रहवासी लंबे समय से आवासीय भूखंडों पर हो रहे अवैध व्यावसायिक निर्माण एवं व्यवसायों के विरुद्ध शिकायत कर रहे हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय निवासी पूर्णेंदु शुक्ला एवं अन्य द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की गई है, जिस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन एवं नगर निगम से जवाब तलब किया है। रहवासियों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी न्यायालय के समक्ष वास्तविक स्थिति प्रस्तुत करने के बजाय तथ्यों को छिपाने एवं गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

रहवासियों ने कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में अवैध निर्माणों के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि किसी आवासीय प्रयोजन के लिए स्वीकृत भूखंड का उपयोग व्यावसायिक अथवा वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए किया जाता है अथवा उस पर नियमों के विपरीत निर्माण किया जाता है, तो संबंधित स्थानीय निकाय एवं जिला प्रशासन ऐसे निर्माणों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने के लिए बाध्य होंगे। आदेशों के पालन में उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित विभिन्न स्थानों पर प्रशासन ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई भी की है। इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने देश के विभिन्न नगर निकायों से भी अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक निर्माणों एवं उन पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण मांगा है।

इसी आधार पर अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि यदि भोपाल नगर निगम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं करता, तो सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की जाएगी। उनका आरोप है कि भोपाल में नगर निगम की मिलीभगत से आवासीय नक्शों की स्वीकृति लेकर अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर सहित अनेक रहवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर व्यावसायिक भवन खड़े कर दिए गए हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीवन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायत मिलने पर नगर निगम केवल दिखावटी कार्रवाई करते हुए छोटे व्यापारियों के विरुद्ध औपचारिक कदम उठाता है, जबकि प्रभावशाली लोगों के प्रतिष्ठानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। कई मामलों में बिना भवन पूर्णता प्रमाण-पत्र (Building Completion Certificate) के ही इमारतों का संचालन जारी है तथा स्वीकृत मानचित्रों का भी खुलेआम उल्लंघन किया गया है। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

रहवासियों ने यह भी कहा कि नगर निगम ने पूरे भोपाल में लगभग 1,000 अवैध व्यावसायिक संस्थानों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने का दावा किया था तथा घोषणा की थी कि 10 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद गुरुवार से सीलिंग अभियान शुरू होगा। किंतु वास्तविक स्थिति यह रही कि अधिकांश बड़े प्रतिष्ठान पूरे दिन खुले रहे। रहवासियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किए जाने पर पाया गया कि कुछ छोटे प्रतिष्ठानों को छोड़कर अधिकांश प्रभावशाली व्यापारिक संस्थान सामान्य रूप से संचालित होते रहे।

संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति का आरोप है कि नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। समिति का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि प्रभावशाली अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने के उद्देश्य से जानबूझकर कमजोर कार्रवाई की जा रही है, ताकि न्यायालय में उन्हें लाभ मिल सके। समिति ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और आशा है कि न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित होगा तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

देश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की ज़रूरत का सिर्फ 3.5% ही पूरा

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health-अंग प्रत्यारोपण यानी ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ Transplant) कई मरीजों के लिए जीवन बचाने का आखिरी विकल्प होता है। लेकिन भारत (India) में ज़रूरतमंद मरीजों के लिए नया अंग मिलना आज भी मुश्किल है। द लैंसेट के रीजनल हेल्थ-साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अंग प्रत्यारोपण की संख्या के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर होने के बावजूद 2021 में भारत में किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों के प्रत्यारोपण की कुल अनुमानित ज़रूरत का सिर्फ करीब 3.5% ही पूरा हो सका। इनमें हार्ट ट्रांसप्लांट की स्थिति सबसे खराब रही, जहाँ ज़रूरत का सिर्फ 0.2% ही पूरा हुआ।

अंग प्रत्यारोपण की मांग और उपलब्धता (2021)
2021 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,26,172 थी। हालांकि इसमें से 9,040 ही ट्रांसप्लांट हुई। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 7.2% रही। लिवर की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 1,85,197 थी। हालांकि इसमें से 2,777 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.5% रही। हार्ट की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 84,347 थी। हालांकि इसमें से 188 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 0.2% रही। फेफड़े की अनुमानित वार्षिक आवश्यकता 10,911 थी। हालांकि इसमें से 133 ही ट्रांसप्लांट हुए। यानी पूरी हुई ज़रूरत सिर्फ 1.2% रही।

किन जगहों पर हुए सबसे ज़्यादा ट्रांसप्लांट?
तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, केरल, महाराष्ट्र और तेलंगाना में देश की लगभग 29% आबादी निवास करती है। हालांकि ट्रांसप्लांट की दर पर गौर किया जाए, तो यह 80% से 96% है। हार्ट, लिवर और फेफड़ों के 85% से ज़्यादा ट्रांसप्लांट इन्हीं पांच राज्यों में हुए थे। किडनी प्रत्यारोपण के मामले में केरल सबसे आगे रहा।

अंग प्रत्यारोपण की मांग (2040)
2040 के आंकड़ों पर गौर किया जाए, तो किडनी की ज़रूरत बढ़कर 1,43,722 तक होने की संभावना है। लिवर की ज़रूरत बढ़कर 2,10,649 तक हो सकती है। हार्ट की ज़रूरत बढ़कर 95,711 तक पहुंच सकती है। फेफड़े की ज़रूरत बढ़कर 12,780 तक हो सकती है।

बच सकती है जान
सही समय पर सही अंग मिल जाने पर कई मरीजों की जान भी बच सकती है। हालांकि इसके लिए व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ जागरूकता फैलाना भी ज़रूरी है, जिससे लोग मृत्यु से पहले अपने अंग दान कर सके।

PM मोदी का संसदीय क्षेत्र राज्य आजीविका मिशन की रैंकिंग में अव्वल

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RAM-प्रदेश राज्य आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के उत्थान, स्व रोजगार और आत्मनिर्भरता में बेहतर कार्य का इनाम वाराणसी को मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में नारी सशक्तिकरण के साथ ही महिलाओं को आर्थिक मजबूत करने की दिशा में शानदार पहल हुई है।

प्रदेशीय आजीविका मिशन के विभिन्न मापदंडों को शामिल करते हुए जारी रैंकिंग में वाराणसी पहले स्थान पर है। मई में भी रैंकिंग प्रथम ही थी। प्रदेश का अंबेडकर नगर दूसरे व बिजनौर को रैकिंग में तीसरा स्थान मिला। मई की रैकिंग के तुलना में इटावा को चार जबकि हापुड़ को दो पायदान का नुकसान हुआ। टाप फाइव में अयोध्या व आगरा जनपद भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखनऊ मुख्यालय हर माह विभिन्न इंडिकेटर को सम्मिलित कर रैंकिंग जारी करता है। मई 2026 की रैकिंग में भी वाराणसी पहले स्थान पर काबिज था। पिछले साल इस उपलब्धि पर मिशन की टीम काे डिप्टी सीएम ने सम्मानित भी किया था।

वाराणसी में समूह से जुड़कर महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार हुआ। उन्हें खुलकर जीवन जीने की आजादी मिली। रोजगार के अवसर मिले। कौशल को निखारने एवं प्रदर्शित करने मंच मिला। आजीविका मिशन के जरिए महिलाओं को आर्थिक, शैक्षिक स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर दे रहा है।

महिलाएं अपने हुनर का प्रदर्शन कर बेहतरीन कार्य कर रही हैं। उनके बनाए उत्पाद को बाजार भी मिल रहा है। प्रेरणा मार्ट, आजीविका संवर्धन केंद्र के अलावा 12 इंटिग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर इसके माध्यम हैं। अब फूड कार्ट के जरिए महिलाएं मिलेट्स को बढ़ावा दे रही हैं।

तीन तारीखों पर बन रहे दुर्लभ संयोग, तीसरा सोमवार होगा खास

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dharm-भगवान शिव की आराधना के सबसे पवित्र श्रावण मास की शुरुआत 30 जुलाई गुरुवार से हो रही है, जो 28 अगस्त शुक्रवार यानी रक्षाबंधन तक रहेगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल सावन पूरे 30 दिन का होगा, जिसमें भक्तो को व्रत और पूजा-अर्चना के लिए 4 सोमवार(Sawan Somwar) मिलेंगे। इस पूरे माह शिव योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष प्रभाव रहेगा। वहीं गुरु पूर्णिमा तिथि बुधवार की शाम तक रहने से कई शिवालयों में शाम से ही रुद्राभिषेक प्रारंभ हो गए।

सावन सोमवार को शिवालयों में होगी विशेष पूजा
श्रावण सोमवार पर महादेव की विशेष पूजा-अर्चना होगी। ज्योतिषाचार्य के मुताबिक श्रवण नक्षत्र में शुरू होने वाले सावन मास में अच्छी वर्षा के कई योग भी बनेंगे। सावन मास की शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी और इस तरह पूरे महीने मंदिरों में भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और श्रृंगार होंगे।

09 अगस्त (रविवार -एकादशी) इस दिन गुरु ग्रह का उदय होगा और साथ ही मृगशिरा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बनेगा। यह योग सर्वत्र बेहतरीन वर्षा कराएगा, लेकिन कुछ चुनिंदा जगहों पर अतिवृष्टि (मूसलाधार बारिश) से भारी नुकसान के संकेत भी मिल रहे हैं।

12 अगस्त: श्रावण मास के दौरान आर्द्रा नक्षत्र में मंगल ग्रह का प्रवेश होगा, जो क्षेत्र में झमाझम और भरपूर बारिश का मजबूत कारक बनेगा।

15 अगस्त : स्वतंत्रता दिवस पर अश्लेषा नक्षत्र में बुध ग्रह का प्रवेश सबसे खतरनाक और भारी वर्षा कारक योग माना जा रहा है। इसके प्रभाव से कई इलाकों में बाढ़ और भयंकर जलभराव की स्थिति बन सकती है, जिससे जन-धन की हानि का भी अंदेशा है।
तीसरे सोमवार क्यों होगा खास?

पूरे 30 दिन के इस सावन में चार सोमवार पड़ेंगे, लेकिन इनमें दो सोमवार खास रहने वाले हैं। 10 अगस्त को सोमवार के साथ प्रदोष व्रत का संयोग रहेगा, जबकि 17 अगस्त को तीसरे सावन सोमवार को नाग पंचमी (Nag Panchami) मनाई जाएगी। एक ही दिन शिव और नाग देवता की आराधना का संयोग होने से शिवालयों में विशेष रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन और भजन-कीर्तन होंगे। श्रद्धालु पूरे महीने सोमवार व्रत रखकर भगवान शिव का गंगाजल, दूध, बेलफा, धतूरा और पंचामृत से अभिषेक करेंगे।

कांवड़ यात्राएं पहुंचेंगी
शिव मंदिरों में सोमवार को हरिद्वार, सोरो सहित अन्य तीर्थ स्थलों से कांवड़ यात्राएं पहुंचेंगी। महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ ही भजन संध्या और जागरण होगा। श्रद्धालु भोलेनाथ को रिझाने के लिए बेलपत्र, धतूरा, भांग और शमी पत्र अर्पित करें।