कभी डकैतों के डर से जहां नहीं खुलते थे स्कूल, अब उसी बीहड़ के सरकारी स्कूल ने देश में गाड़ा झंडा
कभी पाठा का नाम आते ही बीहड़, बंदूक और दस्युओं की दहशत याद आती थी। एक समय ऐसा भी था जब मानिकपुर क्षेत्र के कई विद्यालयों में शिक्षक जाने से कतराते थे और बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे चलती थी। लेकिन अब यही पाठा शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है।
विकास की बदलती तस्वीर के बीच मानिकपुर ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा ने ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने पूरे जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। केंद्र सरकार के स्वच्छ एवं हरित विद्यालय सर्वेक्षण में गढ़चपा विद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर 27 वां तथा उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर की टीम ने किया था भौतिक सत्यापन
देशभर के विद्यालयों से आनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए थे। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले विद्यालयों का राष्ट्रीय स्तर की टीम ने भौतिक सत्यापन किया। उत्तर प्रदेश से केवल चार विद्यालय इस सम्मान के लिए चुने गए, जिनमें चित्रकूट का गढ़चपा विद्यालय भी शामिल है। बीहड़ के पाठा से निकली यह सफलता की कहानी बताती है कि अवसर और संकल्प मिल जाएं तो बदलाव की राह सबसे कठिन इलाकों से भी निकल सकती है।



