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अधिक मास में बना दुर्लभ संयोग, नोट कर लें महत्व

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अधिक मास में बना दुर्लभ संयोग, नोट कर लें महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। साल 2026 में अधिक मास के दौरान पड़ने वाला शुक्र प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है।

पंचांग के अनुसार, अधिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को शाम 7 बजकर 36 मिनट पर शुरू होगी और 13 जून को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण व्रत 12 जून को रखा जाएगा। शिव पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 7:36 बजे से रात 9:20 बजे तक रहेगा।

महिलाओं के लिए शुभ है यह व्रत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। कहा जाता है कि इस समय श्रद्धापूर्वक की गई पूजा, जप और आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है। शुक्रवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सौंदर्य, दांपत्य सुख, वैवाहिक जीवन की मधुरता और आर्थिक समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। महिलाओं के लिए भी यह व्रत अत्यंत शुभ माना गया है।

सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग
इस बार के शुक्र प्रदोष व्रत पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बन रहा है। इसके अलावा, अतिगंड योग और बाद में सुकर्मा योग का प्रभाव रहेगा, जिससे इस दिन किए गए शुभ कार्यों का महत्व और बढ़ जाता है।

व्रत की आसान पूजा विधि
व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को सुबह स्नान कर भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर उपवास या फलाहार करने के बाद प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, चंदन और पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

चूंकि यह व्रत अधिक मास में पड़ रहा है, इसलिए भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा भी विशेष फलदायी मानी गई है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ और “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप भी किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन की बाधाओं को दूर कर सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करती है।

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