नेपाल में एक बार फिर देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के नेतृत्व वाले गुट के राष्ट्रीय सम्मेलन में सनातन धर्म को नेपाल की राष्ट्रीय पहचान के तौर पर बढ़ावा देने का प्रस्ताव सामने आने के बाद सियासी हलचल बढ़ गई है।
देउबा गुट के सम्मेलन में क्या हुआ?
नेपाली कांग्रेस के देउबा गुट के तीन दिवसीय सम्मेलन के समापन पर पांच सूत्रीय घोषणा जारी की गई। इसमें सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई, साथ ही हिंदू, बौद्ध, किरात और प्रकृति-आधारित आस्थाओं तथा सभी समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा का भी उल्लेख किया गया। यह धार्मिक प्रावधान अंतिम समय में घोषणा में जोड़ा गया था।
क्या नेपाल फिर आधिकारिक तौर पर बनेगा हिंदू राष्ट्र?
फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है। नेपाल 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद धर्मनिरपेक्ष संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य बना था। हिंदू राष्ट्र की मांग लंबे समय से देश की राजनीति में मौजूद रही है और 2026 में भी कुछ राजनीतिक दलों ने इसे अपने प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
बालेन शाह सरकार का क्या रुख है?
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी सरकार हिंदू राष्ट्र की बहाली या राजशाही की वापसी के पक्ष में नहीं है। ऐसे में देउबा गुट की ओर से सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने की पहल ने नेपाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान देने की मांग आगे चलकर संविधान में बदलाव और नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने की राजनीतिक मुहिम में बदलती है, या यह केवल पार्टी के भीतर की राजनीतिक रणनीति तक सीमित रहती है।



