मेडिकल एंट्रेंस में सॉल्वर गैंग सक्रिय, चार आरोपी गिरफ्तार
बिहारशरीफ: नीट परीक्षा में सेंधमारी की बड़ी साजिश नाकाम, 60 लाख की डील करने वाले चार नए आरोपी गिरफ्तार
नालंदा पुलिस ने नीट परीक्षा में फर्जी परीक्षार्थी बैठाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज करते हुए चार और शातिर आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए इन आरोपियों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास करने के लिए गिरोह के सरगनाओं के साथ 50 से 60 लाख रुपये का भारी-भरकम सौदा किया था। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि इस सौदे को पक्का करने के लिए आरोपियों ने गिरोह को करीब दो लाख रुपये एडवांस के तौर पर पहले ही दे दिए थे। पूर्व में गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपियों के मोबाइल डेटा और उनकी निशानदेही पर पुलिस की विशेष टीमों ने अलग-अलग जिलों के परीक्षा केंद्रों से इन जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जिसके बाद इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल सात लोग सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं।
मोबाइल चैट और साक्ष्यों ने खोली अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट की पोल
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब राजगीर पुलिस ने पावापुरी चौक के पास चेकिंग के दौरान एक एमबीबीएस छात्र को उसके साथियों के साथ दबोचा था। पुलिस द्वारा मुख्य सरगना अवधेश कुमार के मोबाइल की गहन जांच करने पर ऐसे कई नंबर और चैट मिले, जिनसे नीट परीक्षा में होने वाली बड़ी धांधली का सुराग मिला। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में की गई इस जांच से पता चला कि यह गिरोह सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और औरंगाबाद जैसे शहरों में अपना जाल फैला चुका था। पकड़े गए आरोपियों में से कई प्रतिष्ठित परिवारों और मेडिकल पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जिन्होंने शॉर्टकट से डॉक्टर बनने के चक्कर में लाखों रुपये दांव पर लगा दिए थे।
मुख्य सरगना की गिरफ्तारी से फेल हुई सॉल्वर बैठाने की योजना
पुलिस की कड़ी पूछताछ में पकड़े गए चारों अभियुक्तों—हर्षराज, मनोज कुमार, गौरव कुमार और सुभाष कुमार—ने अपना गुनाह स्वीकार करते हुए बताया कि वे उज्जवल राज और अमन कुमार सिंह जैसे सरगनाओं के संपर्क में थे। उनकी योजना के मुताबिक परीक्षा केंद्रों पर उनकी जगह फर्जी सॉल्वर को बैठना था, लेकिन ऐन वक्त पर गिरोह के मुख्य सदस्यों की गिरफ्तारी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। अभियुक्तों ने कबूला कि मोटी रकम के लालच में उन्होंने परीक्षा से पहले ही डेढ़ से दो लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। पुलिस की टीमें अब इस नेक्सस के अन्य फरार सदस्यों और गिरोह को आर्थिक मदद देने वाले अन्य लोगों की तलाश में जमुई और मुजफ्फरपुर सहित कई ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।
पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी और आगामी कानूनी कार्यवाही
इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने के लिए पावापुरी, छबीलापुर और कतरीसराय जैसे कई थानों की संयुक्त टीम बनाई गई थी, जिन्होंने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस सिंडिकेट को ध्वस्त किया है। डीएसपी ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार किए गए सभी सातों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है और अब पुलिस इनके अन्य बैंक खातों और संपत्तियों की भी जांच कर रही है। विभाग का मानना है कि इस गिरोह के तार बिहार के बाहर अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं, जिसकी गहनता से तफ्तीश की जा रही है ताकि भविष्य में होने वाली परीक्षाओं की शुचिता बरकरार रखी जा सके और मेधावी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा मिल सके।
