राघव चड्ढा की नाराजगी के बीच अरविंद केजरीवाल पर सवाल
इन दिग्गजों ने छोड़ा साथ
भाजपा में शामिल होने वाले सात सांसदों में पंजाब और दिल्ली के कई प्रमुख चेहरे शामिल हैं:
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पंजाब से: राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, डॉ. संदीप पाठक, हरभजन सिंह, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता।
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दिल्ली से: स्वाति मालीवाल।
बगावत के पीछे के संभावित कारण
राजनीतिक गलियारों में इन सांसदों के अचानक हुए हृदय परिवर्तन को लेकर कई चर्चाएं हैं:
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नाराजगी: माना जा रहा है कि राघव चड्ढा और स्वाति मालीवाल पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व और अरविंद केजरीवाल से असंतुष्ट चल रहे थे।
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जांच एजेंसियों का दबाव: 'आप' ने आरोप लगाया है कि अशोक मित्तल को डराने के लिए भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों (ED) का सहारा लिया, क्योंकि हाल ही में उनके ठिकानों पर छापेमारी हुई थी।
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रणनीति में बदलाव: सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नाम डॉ. संदीप पाठक का है, जिन्हें केजरीवाल का बेहद भरोसेमंद और पार्टी का 'चाणक्य' माना जाता था।
डॉ. संदीप पाठक: 'चाणक्य' की विदाई पर सवाल
संदीप पाठक का भाजपा में जाना पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके इस फैसले के पीछे कुछ प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
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पद से हटाना: पंजाब विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाने वाले पाठक को बाद में पंजाब प्रभारी के पद से हटाकर छत्तीसगढ़ भेज दिया गया था। उनकी जगह मनीष सिसोदिया को जिम्मेदारी दी गई, जिससे वे कथित तौर पर आहत थे।
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दिल्ली चुनाव के परिणाम: 2025 के दिल्ली चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भी संगठन के भीतर उन पर सवाल उठाए जा रहे थे।
पार्टी के भीतर और बाहर प्रतिक्रियाएं
संदीप पाठक के इस कदम से 'आप' के अन्य नेता भी स्तब्ध हैं। पार्टी नेता सोमनाथ भारती ने सोशल मीडिया पर अपनी हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि जो व्यक्ति भाजपा को देश के लिए खतरा बताता था, आज उसी के साथ खड़ा है। उन्होंने पाठक द्वारा केजरीवाल के साथ 'जीने-मरने' की कसमों को भी याद दिलाया।
कौन हैं डॉ. संदीप पाठक? मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी संदीप पाठक ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी की है। वे आईआईटी दिल्ली में कार्यरत थे, लेकिन देश की राजनीति बदलने के जज्बे के साथ अपनी प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर आम आदमी पार्टी से जुड़े थे।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल आम आदमी पार्टी के संगठन की मजबूती पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी पूरी तरह बदल दिया है।
