100 मीटर दौड़ में धमाका, Gurinder Vir ने जीता दिल
जालंधर। जालंधर के छोटे से गांव पतिआल के रहने वाले युवा धावक गुरिंदर वीर सिंह ने भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया है। रांची में आयोजित 29वें नेशनल सीनियर फेडरेशन कप में गुरिंदर ने मात्र 10.09 सेकंड में 100 मीटर की दौड़ पूरी कर एक नया राष्ट्रीय कीर्तिमान (National Record) स्थापित किया है। इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही उन्होंने आगामी राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) के लिए भी अपना दावा बेहद मजबूत कर लिया है। गुरिंदर की इस अविश्वसनीय कामयाबी से पूरे जालंधर जिले में जश्न का माहौल है।
जीत के बाद मां को लगाया फोन, दादी ने लड्डू खिलाकर दिया आशीर्वाद
गुरिंदर की इस ऐतिहासिक दौड़ के खत्म होते ही उनके जालंधर स्थित घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। जीत के तुरंत बाद गुरिंदर ने सबसे पहले अपनी मां गुरविंदर कौर को फोन मिलाया और बेहद उत्सुकता से पूछा— "मम्मी, देखी मेरी दौड़?" जिस पर भावुक मां ने कहा— "हां बेटा, तूने कमाल कर दिया।" वहीं उनके पिता कमलजीत सिंह की आंखें भी खुशी से छलक आईं। घर में मौजूद 90 वर्षीय बुजुर्ग दादी चरण कौर ने अपने पोते की इस कामयाबी पर पूरे गांव में लड्डू बांटे और पोते को अपना आशीर्वाद दिया।
खेतों की पगडंडियों से शुरू हुआ सफर, पिता रह चुके हैं वॉलीबॉल खिलाड़ी
गुरिंदर को खेल की प्रेरणा अपने घर से ही मिली। उनके पिता कमलजीत सिंह पंजाब पुलिस से सहायक उप निरीक्षक (ASI) के पद से सेवानिवृत्त हैं और खुद भी अपने समय के बेहतरीन वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। पिता ने बताया कि गुरिंदर को बचपन से ही दौड़ने का जुनून था। वह गांव की गलियों, खेतों और कच्ची पगडंडियों पर दौड़ लगाया करता था। महज 12 साल की उम्र से ही उसने इस खेल को गंभीरता से लिया और प्रोफेशनल ट्रेनिंग शुरू कर दी।
रोजाना 8 घंटे की कड़ी मेहनत और सीने पर लिखा '10.10 सेकंड' का लक्ष्य
इस मुकाम तक पहुंचने के लिए गुरिंदर ने अपनी सुख-सुविधाओं का त्याग किया। उनके पिता के अनुसार, गुरिंदर रोजाना करीब 8 घंटे तक ट्रैक पर पसीना बहाता था, कई बार तो उसे परिवार से बात करने का वक्त भी नहीं मिलता था। इस रेस को लेकर उसका आत्मविश्वास इतना दृढ़ था कि फाइनल दौड़ से ठीक पहले उसने अपनी चेस्ट नंबर (क्रमांक) की चिट के पीछे '10.10 सेकंड' का टारगेट पहले ही लिख दिया था। जब उसने 10.09 सेकंड के साथ रेस जीती, तो उसी नंबर की तरफ इशारा करके अपना जश्न मनाया।
मिल्खा सिंह और उसैन बोल्ड हैं आदर्श, अब ओलंपिक मेडल पर नजर
गुरिंदर की इस शानदार उपलब्धि पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भी ट्वीट कर बधाई दी और कहा कि पंजाब के इस गबरू (युवा) ने पूरी दुनिया में राज्य का मान बढ़ाया है। गुरिंदर के कोच सर्बजीत सिंह ने बताया कि 10.09 सेकंड का समय भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह और दुनिया के सबसे तेज धावक उसैन बोल्ड को अपना आदर्श मानने वाले गुरिंदर का अगला लक्ष्य अब ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतना है।
