मुंबई। शिवसेना (उद्धव बाला साहेब ठाकरे UBT) की हालिया बैठक में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आए हैं. राज्यसभा चुनाव के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सांसदों को संबोधित करते हुए एकजुटता का संदेश दिया था, लेकिन बैठक के दौरान कई मुद्दों पर असहमति भी दिखी. यह जानकारी चुनाव के करीब 10 दिन बाद सामने आई है. सूत्रों ने दावा किया है कि बैठक की शुरुआत करते हुए उद्धव ठाकरे ने सांसदों से साफ कहा कि विपक्षी दल लगातार यह कह रहे हैं कि उनके सांसद टूट सकते हैं, लेकिन उन्हें अपने लोगों पर पूरा भरोसा है। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा था कि वह पूरी राजनीतिक लड़ाई अपने सांसदों के भरोसे ही लड़ रहे हैं. उनके इस बयान का मकसद साफ तौर पर पार्टी में एकता बनाए रखना था.

राज्यसभा सीट पर कांग्रेस का दबाव

सूत्रों का दावा है कि बैठक के बीच ही राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर कांग्रेस की ओर से दबाव भी सामने आया. मल्लिकार्जुन खरगे, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला ने उद्धव ठाकरे से संपर्क कर सीट कांग्रेस को देने की मांग की. इस पर उद्धव ठाकरे ने साफ कहा कि कांग्रेस को इस विषय पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से बात करनी चाहिए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमारे कंधे पर बंदूक रखकर राजनीति करने से कुछ हासिल नहीं होगा।

प्रियंका चतुर्वेदी का विरोध, संजय राउत पर सवाल

दावा है कि बैठक के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब निवर्तमान राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी अचानक नाराज हो गईं. उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि वह विरोध दर्ज कराना चाहती हैं और सवाल उठाया कि संजय राउत ने शरद पवार का नाम क्यों लिया. इस पर उद्धव ठाकरे ने तुरंत संजय राउत का बचाव किया और कहा कि अंतिम फैसला पार्टी प्रमुख के तौर पर वही लेंगे।

बैठक के बाद भी उठे सवाल

दावा है कि बैठक खत्म होने के बाद भी असंतोष खत्म नहीं हुआ. एक सांसद ने सवाल उठाया कि प्रियंका चतुर्वेदी को छह साल मौका देने के बाद भी क्या हासिल हुआ? वहीं मराठवाड़ा के एक सांसद ने आदित्य ठाकरे की सक्रियता पर सवाल खड़े किए. उनका कहना था कि आदित्य को पूरे महाराष्ट्र में ज्यादा सक्रिय होकर दौरे करने चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद आदित्य ठाकरे ने ज्यादा बातचीत नहीं की और कुछ नाराज़ नजर आए. उनकी चुप्पी ने भी पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और हवा दे दी. यह बैठक जहां एक तरफ एकजुटता का संदेश देने के लिए बुलाई गई थी, वहीं दूसरी तरफ इसने पार्टी के अंदर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर दिया।