50 हजार के इनामी को दी गई कुर्सी, राजनीति में हलचल
लखनऊ|यूपी में सियासी दलों के अजब-गजब कारनामे सामने आते रहते हैं। ऐसी ही घटना भगवा दल की चर्चा में है। वहीं, पश्चिम यूपी के एक जिले की शस्त्र लीला की परतें भी खुल रही हैं। उधर, भइया जी ने टिकट के दावेदार कम करने का अजब ही फॉर्मूला निकाल लिया। पढ़ें, आज की कानाफूसी:
माफिया को दिलाई कुर्सी
राजनीति में अपराधीकरण के खिलाफ ढिंढोरा पीटने वाले भगवा दल में इन दिनों रामनगरी के जिला संगठन में एक माफिया को जिला संगठन में कुर्सी देने की चर्चा खूब हो रही है। चर्चा है कि करीब एक दशक से प्रदेश संगठन में प्रभावशाली ओहदा संभाले एक नेताजी ने भरी बैठक में हाथ जोड़कर प्रदेश नेतृत्व से सात खून माफ करते हुए कुर्सी देने के लिए गुहार लगाई। इसके बाद उस माफिया को जिला संगठन में महत्वपूर्ण कुर्सी दे दी गई जिस पर भगवा सरकार में 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। जेल के भीतर जन्मदिन पर बड़ी केक पार्टी देकर भी माफिया ने खूब सूर्खियां बटोरी थीं।
लाइसेंस लीला में बचाव की दौड़
पश्चिम यूपी के एक जिले में शस्त्र लाइसेंस की पुरानी लीला की परतें खुलने लगी हैं। मामला करीब एक दशक पुराना है लेकिन परतें अब खुल रही हैं। तफ्तीश जारी है। कई बड़े साहब भी जांच की जद में आ गए हैं। उनका भी गला सूखने लगा है। आभास हो रहा है कि थाना-कचहरी उनको भी करना पड़ सकता है। सपनों में उनके कदम सलाखों की तरफ बढ़ते दिख रहे हैं। इसलिए वह राहत की तलाश में जद्दोजहद कर रहे हैं। वह इस उम्मीद में दर-दर भटककर कुंडी खटका रहे हैं कि शायद कहीं से कृपा बरस जाए। अब देखना होगा कि साहब लोगों पर कृपा बरसती है या कानून का शिकंजा कसेगा?
दावेदार कम करने का ऑटो फॉर्मूला
साइकिल प्रिय पार्टी में 10-12 नेता अलग-अलग जिलों में जिलाध्यक्ष बनना चाहते हैं। वे लंबे समय से अपनी गोटियां बिछा रहे हैं। ये नेता भैयाजी के पास पहुंचे तो उन्होंने एक शर्त रख दी। जिलाध्यक्ष तो बना दिए जाओगे लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मांगोगे। फिर क्या था, बताते हैं कि 75 फीसदी जिलाध्यक्ष के दावेदार कम हो गए हैं।
